लिंगराज मंदिर का इतिहास

 








Lingaraja Temple का निर्माण 11वीं सदी में हुआ था और इसे कलिङ्ग राजा Anantavarman Chodaganga ने बनवाया था। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और यह भारत के ओडिशा राज्य के बुभनेश्वर नगर में स्थित है। इसका नाम 'लिंगराज' भगवान शिव के एक प्रमुख रूप के नाम पर आधारित है।


इस मंदिर की विशेषता उसके शैलीकला और शैली है जो कि कलिङ्ग शैली के अद्वितीय उदाहरणों में से एक है। यह शैली भारतीय शैली में विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण मानी जाती है और इसे कालिंग शैली भी कहा जाता है।


मंदिर की भव्यता और उसका साहित्यिक इतिहास इसे एक महत्त्वपूर्ण हिन्दू धार्मिक स्थल बनाते हैं। इसका निर्माण लगभग 55,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में किया गया है और यह विभिन्न मंदिरों, कुण्डलों, और यज्ञशालाओं के साथ एक बड़े समृद्धि क्षेत्र का हिस्सा है।


इसकी भव्यता को देखते हुए, यह मंदिर एक प्रमुख पर्यटन स्थल भी है और विभिन्न कला और संस्कृति प्रेमियों को आकर्षित करता है। इसकी ऊचाई और अद्वितीय स्थिति के कारण, यह मंदिर धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है।


मंदिर का समय के साथ कई बार निर्माण हुआ और पुनर्निर्माण हुआ है, लेकिन इसकी मौखिक परंपरा और भगवान शिव के प्रति भक्ति ने कभी भी इसकी महत्वपूर्णता को कम नहीं किया है।

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