खजुराहो मंदिरों का इतिहास उत्तर प्रदेश, भारत में स्थित है और यह हिंदू धर्म के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। ये मंदिर विशेषत: चंदेल राजवंश के शासकों द्वारा बनवाए गए थे, और इसका निर्माण 10वीं और 11वीं सदी के बीच हुआ था।
**मुख्य विशेषताएँ:**
1. **चंदेल साहित्य और सांस्कृतिक समृद्धि:** खजुराहो के मंदिर चंदेल राजवंश के राजा धंगदेव के शासनकाल में उत्कृष्ट साहित्य और सांस्कृतिक समृद्धि के केंद्र थे।
2. **नृत्य और कला की मूर्तियाँ:** खजुराहो के मंदिरों की विशेषता में से एक यह थी कि यहां की मूर्तियाँ अद्वितीय रूप से नृत्य और कला की अद्वितीयता को दर्शाती थीं।
3. **नृत्यशाला और कामसूत्र के आलोक में:** इन मंदिरों में नृत्यशाला का सुंदर निर्माण था जो नृत्य कला के प्रशिक्षण के लिए बनाई गई थीं। इसे कामसूत्र के सुझावों के साथ जोड़ा जाता है।
4. **अर्थशास्त्र और राजनीतिक चित्रकला:** मंदिरों की शृंगार रूप रेखा और चित्रकला में अर्थशास्त्र और राजनीतिक संकेतों का सुंदर सम्बन्ध दिखता है।
5. **योगिक और तांत्रिक आदान-प्रदान:** खजुराहो के मंदिरों में योगिक और तांत्रिक आदान-प्रदान का विशेष महत्व था। मंदिरों के शिवलिंग पर योगासन की चित्रण भी किया गया है।
**इतिहासिक पृष्ठभूमि:**
खजुराहो के मंदिर ने सम्राट यशोवर्द्धन (चंदेल राजवंश के संस्थापक) के सामयिक समय में आरंभ होकर चंदेल राजवंश के अनेक राजाओं द्वारा निर्मित हुए। इन मंदिरों का निर्माण लगभग 950 से 1050 ईसा पूर्व के बीच हुआ था।
ये मंदिरों की शृंगार रूप रेखाएं और सुंदरता ने खज
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