श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर

 








श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर, जो तिरुवनंतपुरम, केरल, भारत में स्थित है, एक समृद्ध और प्राचीन इतिहास से भरा हुआ है। यहां एक संक्षेप में उसका इतिहास है:


1. **प्रारंभिक इतिहास:** मंदिर भगवान पद्मनाभ को समर्पित है, विष्णु के एक रूप, और इसकी उत्पत्ति एक हजार वर्षों से अधिक समय पहले तक जाती है। पुराणों जैसे प्राचीन ग्रंथों में यह मंदिर उल्लेखित है।


2. **नींव और विकास:** इस मंदिर की वर्तमान संरचना की नींव 8वीं सदी में रखी गई थी, जब चेरा राजा मार्तांड वर्मा शासन कर रहे थे। हालांकि, बड़े रूप में सुधार और विस्तार का कार्य बाद के शासकों ने किया, जैसे कि त्रावणकोर राजाएं।


3. **त्रावणकोर वंश के योगदान:** त्रावणकोर राजपरिवार, विशेषकर राजा अनिझम थिरुनाल मार्तांड वर्मा, ने मंदिर के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 18वीं सदी में, राजा ने त्रावणकोर साम्राज्य को भगवान पद्मनाभ को समर्पित कर दिया, और इसके बाद से शासक खुद को पद्मनाभ दास (पद्मनाभ के दास) मानते थे।


4. **स्थापत्य और महत्व:** मंदिर ड्रविड़ शैली के जटिल वास्तुकला के लिए जाना जाता है। संकीर्ण्ण सैन्यासी पद्मनाभ देव की 57-फीट ऊची मूर्ति, जिसे सर्प अनंत से सजाकर, मंदिर का प्रमुख आकर्षण है। मूर्ति को Katusarkara yogam कहलाने वाले विभिन्न सामग्रियों का एक अद्वितीय मिश्रण से बनाया गया है।


5. **छिपा धन:** मंदिर की गर्भगृह में पाए जाने वाले अमूल्य वस्तुओं के लिए हाल ही में हुई खोज ने इसे विश्वभर में सबसे धनी धार्मिक संस्थानों में एक बना दिया।


6. **पद्मनाभस्वामी मंदिर का मामला:** मंदिर की खजाने में पाए जाने वाले धन के कारण इस पर सुप्रीम कोर्ट ने आपत्ति और सांस्कृतिक चर्चाओं की बातचीत की। भारतीय सर्वोच्च न्यायालय ने मंदिर के संपत्ति के प्रबंधन और उपयोग की निर्णय लेने के लिए इस मामले को सुना।


श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर न केवल एक पूजा स्थल के रूप म

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